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आनंद खेमे ने दिखाई ताकत वीरभद्र रहे रेली मे गेर मोजूद ,


विधानसभा चुनाव हारने के बाद आपसी कलह में उलझी कांग्रेस में पहली बार आनंद खेमे का मजबूत उदय दिखा। नई पीढ़ी की सियासत आनंद शर्मा के कंधों पर सवार होती दिख रही है। लोस चुनाव से पहले हिमाचल में राहुल गांधी की पहली परिवर्तन रैली में वीरभद्र सिंह की गैर मौजूदगी के बीच कांग्रेस को एकता के सूत्र में पिरोने की कोशिश की गई। मंच पर जैसे ही राहुल आए तो आनंद शर्मा उनके बगल वाली कुर्सी पर बैठे।

लेकिन, इसके बाद कुर्सी से उठ गए और अपनी जगह नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर को बिठाकर मंच से भी खूब तारीफों के पुल बांधे। कुलदीप राठौर ने भी आनंद शर्मा के लिए कसीदे पढ़े। राठौर ने यहां तक कह दिया कि आनंद शर्मा हिमाचल के रहने वाले हैं इनको बोलने का ज्यादा मौका दें।


यह रैली नए समीकरणों को जन्म दे रही थी। अधिकतर नेता मंच पर राहुल के साथ-साथ आनंद शर्मा से नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश में लगे थे। इससे इतर राहुल गांधी ने भी मंच से एकता का संदेश देते हुए पुराने और नए नेताओं का नाम लेकर गुटबाजी पर लगाम लगाने की कोशिश की। 

आनंद खेमे ने दिखाई ताकत  वीरभद्र रहे रेली मे गेर मोजूद


राहुल के बगल वाली कुर्सी पर नेता बैठे बारी-बारी

मुकेश अग्निहोत्री और कुलदीप राठौर भी राहुल के समक्ष आपस में खूब जुगलबंदी दिखाने की कोशिश कर रहे थे। रैली के दौरान जनता ने राहुल-राहुल का नारा भी लगाया। उधर, वीरभद्र के खिलाफ खुलेआम मोर्चा संभालने वाले सुक्खू को भी राहुल और आनंद ने नजरअंदाज नहीं किया।राठौर के उठने पर बाली तुरंत उनकी सीट पर बैठकर राहुल से बतियाने लगे। इसके बाद आशा कुुमारी ने भी मौका पाकर इसी कुर्सी पर बैठक राहुल से बात की। राठौर के उठने के बाद मुकेश भी इस कुर्सी पर बैठ गए। अंत में सुधीर ने भी मौका पाकर बगल वाली कुर्सी पर बैठकर राहुल से बात की।

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