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होली महोत्सव पर काली माता की झांकी 3 क्विंटल फूलों से सजाई

होली महोत्सव के दौरान पालमपुर के लोगों को सबसे अधिक इंतजार कालीबाड़ी मंदिर से निकलने वाली काली माता की झांकी का  रहता है पालमपुर सहित आसपास के क्षेत्रों के लोग देर शाम तक काली माता की झांकी के दर्शन करने को बैठे रहते हैं 

होली के अवसर पर काली माता की झांकी निकालने की प्रथा वरसों पुरानी और लोगों की अत्यधिक श्रद्धा का प्रतीक है बुधवार को सुबह से ही काली माता की झांकी को तैयार किए जाने का कार्य शुरू किया गया सुबह हुई भारी बारिश के बाद मां की झांकी तैयार करने के समय मौसम साफ हो गया इस बार काली माता की झांकी को विभिन्न किस्मों के 3 क्विंटल फूलों से सजाया गया था 
होली महोत्सव पर काली माता की झांकी 3 क्विंटल फूलों से सजाई

वहीं विशेष किसम के ईत्तर का छिड़काव किया गया था खुशबूदार फूलों में इत्र की खुशबू से महकती हुई झांकी जब निकली तो मानो सारा वातावरण महक उठा और मां के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा

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होली कमेटी के सदस्य अनूप शर्मा ने बताया कि मां की झांकी की सजावट के लिए दिल्ली से अनुभवी कारीगरों की टीम को पालमपुर बुलाया गया था झांकी की परिक्रमा के दौरान एक विशेष किस्म का खुशबूदार इत्र का छिड़काव किया गया था

एक ही व्यक्ति 3 दशक से काली माता का रूप धारण कर रहा है



कालीबाड़ी माता मंदिर से निकले जाने वाली मां काली की झांकी लोगों की आस्था का प्रतीक है इसमें मां काली का रूप धारण एक भी व्यक्ति करीब 3 दशक से कर रहा है गौर रहे कि होली महोत्सव के दौरान पालमपुर बंदला लोहना और  घूघर से 4 दिन झांकियां निकाली जाती है और इसमें तीसरे दिन निकाली जाने वाली काली मां की जानकी का विशेष स्थान है झांकी के लिए मां काली का रूप धारण करने वाले व्यक्ति को विशेष पूजा पाठ के बीच तैयार किया जाता है

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