माँ की बजह से बना गायक आज पुरे देश लोगों के दिलो मे बनाई जगह
हिमाचल के सिंगर भी आज देश भर मे अपनी पहचान बना रहे है इसी तरह वर्ष 2009 में वॉयस ऑफ हिमालय के विजेता रह चुके रमेश ठाकुर आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। प्रदेश में ऐसे अलग लोक कलाकार हैं, जिन्होंने कुल्लवी, लाहौली और नेपाली गीत गाए हैं। 32 साल के रमेश ठाकुर निवासी वामीनाला भुंतर की रास्ता आसान नहीं था।कॉलेज में पढ़ाई के दौरान जब रमेश ने पहला ऑडियो ‘बांकी पड़ोसन’ रिकॅार्ड करना चाहा तो उनके पास इतने पैसे नहीं थे। पर कहते है कोई साथ दे या ना दे पर माँ हमेशा अपने बच्चों का साथ देती है उसी तरह उनकी मां ने मदद करते हुए कुछ पैसे दिए। उसके बाद रमेश ने पहला ऑडियो ‘बांकी पड़ोसन’ रिकॉर्ड किया था। इसके बाद रमेश ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक पहाड़ी गीतों से वह आज दर्शकों-श्रोताओं के दिलों पर राज करते हैं। और दर्शक भी उने बहुत प्यार करते है |
उनके दोबारा गाये गये मुख्य गाने
रमेश के ‘बांकी पौटू आलिए’ को 12 लाख 51 हजार 647 व्यूज, ‘सैंज म्हारा होटल’ को 9 लाख 74 हजार 141, ‘तेरी नगरी दिल मूं लाणा’ को 7 लाख 95 हजार, 169 व्यूज, जबकि ‘बांकी पड़ोसन’ को महज तीन दिन में 1 लाख 46 हजार व्यूज मिल चुके हैं। अब तक रमेश ठाकुर हिमाचल के सभी अंतरराष्ट्रीय मंच कुल्लू का दशहरा, मंडी शिवरात्रि, मिंजर मेला आदि में प्रस्तुतियां दे चुके हैं। रमेश ठाकुर ने कुल्लवी लोकगीत लगभग 150, जबकि 30 लाहौली गीत गाए हैं। और वह आज हिमाचल की बहुत बड़ी आवाज बन चुके है | और अपने पर्देश का नाम रोशन कर रहे है

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