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पांच साल किया जाता महा पूजा दुर्गा यग्य जानिए इसकी महिमा के बारे मे



कोटखाई की आठ पंचायतों के लोग की ओर आयोजित मां तुनाकाली के उत्पत्ति स्थान पर सात दिवसीय यज्ञ का आज समापन हो जाएगा। करीब नौ हजार फुट की ऊंचाई पर होने वाले यज्ञ में शिरकत करने के लिए पुजैली गांव से माता दुर्गा की पालकी सोमवार को रवाना हो गई है। यज्ञ के समापन पर आज धाम आयोजन किया जाएगा। तुनाकाली का यज्ञ हर पांच साल बाद किया जाता है। यज्ञ में आसपास की करीब आठ पंचायतें के दो सौ लोग पहुंच पांच दिनों से तंबू लगाकर घने जंगलों के बीच रह रहे हैं। यज्ञ स्थल सड़क से करीब पांच किलोमीटर दूर है। माता दुर्गा पुजैली की पालकी के साथ बागा, चलनैर गांव के लोग सोमवार को पुजैली से चेवर तक 12 किलोमीटर दूरी तय करेंगे। दूसरे दिन मंगलवार सुबह आठ बजे दुर्गा माता की पालकी को तीन गांव के लोग चेवर से तुना शिखर के लिए पांच किलोमीटर पगडंडी का रास्ता तय करेंगे। पूर्ण आहुति में अढ़ाई से तीन हजार लोग पहुंचेंगे। यहां पहुंचने के लिए लोगों को नौ हजार फीट की ऊंचाई पर मुश्किल सफर तय करना पड़ता है। कलेमू और चेवर गांव से पांच किलोमीटर खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। देवदार के घने जंगल और संकरा रास्ते से होकर लोगों को गुजरना पड़ता है। यह यज्ञ तीन मई को शुरु हुआ था। धाम के बाद मंगलवार शाम को दुर्गा माता की पालकी अपने गांव पुजैली लौट आएगी। 

पांच साल किया जाता महा पूजा दुर्गा यग्य जानिए इसकी महिमा के बारे मे



वहीं इस संबंध में माता के पुजारी रामानंद शर्मा देविंद्र सावंत और प्रकाश सावंत के अनुसार यज्ञ के दौरान लोग रात के समय लोग तंबुओं में रहते हैं। माता के पहुंचने पर यज्ञ की पूर्णाहुति होगी। उसके बाद यहां पर धाम का आयोजन किया जाएगा। इस यज्ञ को पांच साल बाद क्षेत्र की सुख-समृद्घि के लिए किया जाता है।


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