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दुसरे दिन भी नहीं पहुंचे मॉर्डन स्कूल डांड छात्र, खाली रहे क्लास रूम

 राजकीय मॉडर्न वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला डांड में दूसरे दिन शुक्रवार को भी अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। इस कारण स्कूल परिसर सूना सूना ही नजर आया। स्कूल में दसवीं और बारहवीं कक्षा का वार्षिक परीक्षा परिणाम खराब आने से अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इसके चलते अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजने से इंकार कर दिया है।

क्योंकि स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए अध्यापक ही नहीं है। दो अध्यापकों से दस अध्यापकों की पढ़ाई करवाई जा रही है। इस कारण बच्चे वार्षिक परीक्षा में फेल हो रहे हैं। शुक्रवार को बच्चों के स्थान पर अभिभावक स्कूल पहुंचे। अभिभावकों ने प्रधानाचार्य को ज्ञापन सौंप कर साफ किया कि जब तक कोई बड़ा विभागीय अधिकारी या प्रशासन की ओर से अभिभावकों को पक्का आश्वासन नहीं देता। तब तक वे अपने बच्चों को स्कूल में नहीं भेजेंगे।
इतना ही नहीं सभी बच्चों के अभिभावक लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे। लोकसभा चुनाव के बाद भी स्कूल में अध्यापकों की कमी पूरी नहीं हुई तो अभिभावक उग्र आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। क्योंकि यह उनके बच्चों के भविष्य का सवाल है। अगर बच्चे शिक्षा में निपुण नहीं होंगे, तो भविष्य में आगे नहीं बढ़ पाएंगे।

सरकार ने बेहतर शिक्षा के लिए डांड में मॉडर्न स्कूल तो खोल दिया है, लेकिन स्कूल में अध्यापकों के पद नहीं भरे। इस कारण परिणाम परिणाम इतना खराब रहा है।

स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भोला राम, सोनू, राजिंद्र, लेख राज, बशीर मोहम्मद, बानो, सीमा, लेखो देवी, फिरोजदी, प्यार चंद, चतर सिंह, शेर सिंह, संजय कुमार और हीलो देवी ने सरकार और प्रशासन से समस्या का समाधान करने की मांग की है। एसडीएम सलूणी विजय कुमार धीमान ने बताया उनके ध्यान में यह मामला अभी लाया गया है। जल्द ही स्थिति का जायजा लेकर मामले को सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।

इन विषयों के प्रवक्ताओं के पद हैं खाली

स्कूल में अंग्रेजी, हिंदी, कंप्यूटर साइंस, इतिहास, जियोग्रॉफी, केमिस्ट्री, फिजिक्स और बॉयोलॉजी विषय के प्रवक्ताओं के पद खाली पड़े हैं। इन विषयों की पढ़ाई भी स्कूल में तैनात इकोनॉमिक्स और मैथ के अध्यापकों को करवानी पड़ रही है

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