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आधार कार्ड न होने पर तड़पने के लिए छोड़ दी प्रसव पीड़ा से कराहती महिला

सिविल अस्पताल नेरवा में इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। प्रसव पीड़ा से कराह रही एक नेपाली महिला को आधार कार्ड न होने पर अस्पताल में उसके हाल पर ही छोड़ दिया गया। महिला की डिलीवरी तक करवाने को अस्पताल कोई डॉक्टर या स्वास्थ्य कर्मचारी नहीं पहुंचा।
पति प्रसव पीड़ा तेज होने पर मजबूरन बाहर से अपनी रिश्तेदार महिला को बुलाया। उस महिला ने आकर अस्पताल के लेबर रूम में गर्भवती की डिलीवरी करवाई। बाद में उसने लेबर रूम को भी साफ किया।

मंगलवार शाम को चार बजे नेपाली मजदूर काली बहादुर प्रसव पीड़ा शुरू होने पर पत्नी मोनिका को लेकर सिविल अस्पताल नेरवा पहुंचा। अस्पताल के बिस्तर पर लिटाने के बाद उसका आधार कार्ड मांगा गया, लेकिन नेपाली के पास आधार कार्ड नहीं था।

लिहाजा, प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को उसके हाल पर छोड़ दिया गया। इस दौरान अस्पताल में न कोई चिकित्सक मौजूद था और न ही कोई अन्य कर्मचारी मोनिका की सुध लेने आया। मंगलवार रात करीब 9 बजे महिला की प्रसव पीड़ा तेज होने पर नेपाली मजदूर ने अपनी रिश्तेदार अमृता को अस्पताल बुलाया।
स्थानीय लोगों में अस्पताल प्रशासन के खिलाफ रोष
अमृता ने अस्पताल पहुंचकर रात इसके बाद लेबर रूम की सफाई भी की। एक सरकारी दस्तावेज न होने पर दो जिंदगियों को दांव पर लगाने की इस घटना ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर उठा दिया है। मामला प्रकाश में आने पर स्थानीय लोगों में अस्पताल प्रशासन के खिलाफ रोष है।

उधर, बताया जा रहा है कि अस्पताल में लापरवाही का ऐसा पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं।

पिछले साल भी अपने मायके नेरवा आई पालमपुर की महिला को पेट में तेज दर्द होने पर रात को परिजन अस्पताल पहुंचे थे तो रात को चिकित्सक नहीं पहुंचे थे। नर्स ने ही फर्स्ट एड दिया और ड्रिप लगाया था।
पीड़िता को तत्काल दिया जाना चाहिए उपचार
कार्यवाहक बीएमओ डॉ. अरविंद मेहरा ने बताया कि वह विभाग की मीटिंग के चलते शिमला गए हैं। दस बजे मोनिका की डिलीवरी करवाई। उनके मुताबिक अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि वह 11 जून को नेरवा आएंगे, तभी मामले में कुछ बता पाएंगे।

लेबर पेन में अस्पताल आई पीड़िता को तत्काल उपचार दिया जाना चाहिए। महिला को उपचार क्यों नहीं दिया गया, इस बारे में अस्पताल में तैनात डॉक्टर और अन्य कर्मियों से जानकारी ली जाएगी। अगर इसमें गलती पाई जाती है तो जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएंगी।- डॉ. नीरज मित्तल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी जिला शिमला

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