Breaking News

अपनी ही जान सुरक्षित नही तो दुसरो की जान केसे बचाए

 जोगिंद्रनगर, पधर और चौहारघाटी की करीब दो लाख से अधिक आबादी को प्राकृतिक आपदा से बचाने का जिम्मा उठाने वाले दमकल विभाग के जवान खुद असुरक्षित भवन में रहने को मजूबर है



अपनी ही जान सुरक्षित नही तो दुसरो की जान केसे बजाये



जोगिंद्रनगर दमकल चौकी की हालत जर्जर है। यह कभी भी ढह सकती है। इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं। भवन की छतों और दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं। बदहाल भवन कब जमींदोज हो जाए, इसका डर भी जवानों को सता रहा है। खासकर कुमारहट्टी की घटना के बाद जवान सहम गए हैं। दमकल के जवानों के भवन की मरम्मत पर अधिकारी लापरवाह रहे हैं। दमकल चौकी कार्यालय का शुभारंभ 4 अगस्त 2012 को हुआ। बीते सात साल में जवानों ने उपमंडल जोगिंद्रनगर, पधर और चौहारघाटी में 200 से अधिक प्राकृतिक आपदाओं और अन्य हादसों में लोगों के जानमाल की सुरक्षा की। लगभग 16 करोड़ से अधिक की संपति को भी दमकल के जवानों ने सुरक्षित किया है।

No comments