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हाईकोर्ट के आदेश पर परिजनों को सौंपे युग के अवशेष, बिलख पड़ी मां

राजधानी शिमला के चार साल के मासूम युग की निर्मम हत्या के पांच साल, तीन माह और पांच दिन बाद परिजनों को कोर्ट के आदेशों पर युग के अवशेष दिए गए। शुक्रवार शाम पांच बजे चक्कर न्यायालय परिसर में सौंपे अवशेष के बाद पिता ने कैलस्टन के उस टैंक के पास युग की आत्मा की शांति के लिए हवन भी करवाया जिसमें युग को फेंका था। 

परिवार के अन्य सदस्यों ने भी इस हवन में आहुतियां डालीं। इसके बाद पिता और रिश्तेदारों ने अवशेष के कलश को बस स्टैंड स्थित गुरुद्वारे में रखा और रात 10 बजे अस्थियों को लेकर परिजन हरिद्वार रवाना हो गए। पिता विनोद, माता पिंकी और दादी चंद्रलेखा ने जैसे ही अस्थि कलश को देखा तो बरबस ही उनकी आंखों से आंसू टपकना शुरू हो गए।

उनकी आंखों के सामने अपने लाडले की सारी यादें ताजा हो गईं। परिवार इतने लंबे समय से मासूम युग की आत्मा की शांति के लिए हिंदु संस्कारों की रस्में पूरी करने का इंतजार कर रहा था। परिजनों की दर्दनाक चीखों को सुनकर हर किसी के आंखों में आंसु आ गए।

पिछले महीने लगाई थी गुहार

बीते माह पिता ने उच्च न्यायालय में अपने बेटे के अंतिम संस्कार की रस्म पूरी करने के लिए अस्तियां सौंपने की गुहार लगाई थी। इस पर शुक्रवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाया और अस्थियां देने के आदेश दिए। 

युग के पिता विनोद, मां और दादी का कहना है कि वे अब तक यही सोच रहे थे कि उनके लाडले की आत्मा आज तक शांत नहीं हुई है। इसकी आत्मा की शांति के लिए अंतिम संस्कार करना चाह रहे थे। अदालत ने उनकी संवेदनाओं और भावनाओं को समझते हुए अपना फैसला दिया।

अब वे युग के अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कर सकेंगे। अस्थि कलश को गुरुद्वारा में रखने के बाद विनोद अपने घर लौटे और वहां उनके पूरे परिवार के बेटे की निर्मम हत्या के पांच साल पुराने सारे दर्द ताजा हो गए। पूरा परिवार युग को याद मायूस नजर आया। 

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