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आदर्श स्कूल में 109 में से 12 विद्यार्थी पास, अभिभावकों ने बंद करवाया


राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला डांड में दसवीं और बारहवीं कक्षा के खराब वार्षिक परिणाम के बाद स्कूल को ताला लगाने की नौबत आ गई है। खराब परीक्षा परिणाम से खफा अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है।गुरुवार को स्कूल में छठी से लेकर बारहवीं की कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं स्कूल नहीं गए। इस कारण स्कूल की कक्षाएं खाली नजर आईं। अभिभावकों ने निर्णय कर लिया है कि जब तक स्कूल में अध्यापकों के सभी रिक्त पदों को नहीं भरा जाता।

जब तक वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे। इतना ही नहीं अभिभावकों ने यह भी साफ कर दिया है कि इस बार लोकसभा चुनाव में ग्राम पंचायत डांड और किहार में कोई भी अपने मत का प्रयोग नहीं करेगा।

स्कूल प्रबंधन समिति अध्यक्ष भोला मिन्हास, अभिभावक निधिया राम, रविंद्र, अशोक कुमार, सोनू मिन्हास, बेग मोहम्मद, बशीर मोहम्मद, मुस्तफा और राजकुमार ने बताया कि रावमापा डांड को वर्ष 2009 में आदर्श स्कूल का दर्जा मिला था।

मगर आदर्श स्कूल में जो सुविधाएं छात्रों को मिलनी चाहिए। ऐसी सुविधाएं आज तक छात्रों को नहीं मिल पाई। शिक्षकों के पद खाली हैं। दसवीं कक्षा में 71 बच्चों में से मात्र दस बच्चे ही पास हुए और 12वीं कक्षा में 38 बच्चों में से दो ही पास हो पाए।

स्कूल में अंग्रेजी, हिंदी, कंप्यूटर साइंस, इतिहास, जियोग्रॉफी, केमिस्ट्री, फिजिक्स और बायोलॉजी विषय के प्रवक्ताओं के पद खाली पड़े हैं। इन विषय की पढ़ाई भी स्कूल में तैनात इकोनॉमिक्स और हिसाब के अध्यापकों को करवानी पड़ रही है।

उच्च शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय के अधीक्षक ग्रेड-एक अरविंद शर्मा ने बताया कि उनके ध्यान में यह मामला अभी लाया गया है। इस मामले को लेकर उच्च अधिकारियों से बात करेंगे।  किया जाएगा

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