इंश्योरेंस घोटाले में डाक विभाग के अफसरों से पूछताछ, कब्जे में लिया रिकॉर्ड
पालमपुर उप डाकघर में हुए करीब डेढ़ करोड़ के इंश्योरेंस घोटाले में सीबीआई ने डाक विभाग के अधिकारियों को शिमला कार्यालय में तलब किया। इस दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी ने विभाग के कई अधिकारियों से घोटाले से संबंधित रिकॉर्ड जब्त किया तो वहीं लंबी पूछताछ भी की है
सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक डाक विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जब विभाग में हर वर्ष ऑडिट होता है और वित्तीय संबंधित जानकारी उच्च अधिकारियों तक जाती है तो यह घोटाला कैसे हो गया? सीबीआई ने इसको लेकर वीरवार को संबंधित अधिकारियों से पूरा दिन सवाल जवाब किए।
वहीं, शुक्रवार को भी विभागीय अधिकारियों से पूछताछ होगी। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में संबंधित बैंक के अधिकारियों समेत कृषि विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और अधिकारियों को भी पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा। अभी तक की जांच में सामने आया है कि उप डाकघर पालमपुर में विवि कर्मचारियों के हर महीने इंश्योरेंस की रकम को उप डाकघर के अधिकारी ने हड़प लिया था।
हालांकि इसको लेकर कृषि विवि की बड़ी लापरवाही भी सामने आई थी, जिसमें पता चला था कि विवि ने क्रॉस्ड चेक की जगह अनक्रॉस्ड चेक जारी किए, जिस वजह से आरोपी करीब 1,38,42840 की रकम को बैंक से निकलवाने में कामयाब हो गया है। इसको लेकर विवि की कार्यप्रणाली पहले ही सीबीआई के रडार पर है। ऐसे में विवि की संबंधित शाखा के कर्मचारियों अधिकारियों पर शिकंजा कस सकता है। यह घोटाला वर्ष 2015 से 2018 के बीच हुआ है
सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक डाक विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जब विभाग में हर वर्ष ऑडिट होता है और वित्तीय संबंधित जानकारी उच्च अधिकारियों तक जाती है तो यह घोटाला कैसे हो गया? सीबीआई ने इसको लेकर वीरवार को संबंधित अधिकारियों से पूरा दिन सवाल जवाब किए।
वहीं, शुक्रवार को भी विभागीय अधिकारियों से पूछताछ होगी। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में संबंधित बैंक के अधिकारियों समेत कृषि विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और अधिकारियों को भी पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा। अभी तक की जांच में सामने आया है कि उप डाकघर पालमपुर में विवि कर्मचारियों के हर महीने इंश्योरेंस की रकम को उप डाकघर के अधिकारी ने हड़प लिया था।
हालांकि इसको लेकर कृषि विवि की बड़ी लापरवाही भी सामने आई थी, जिसमें पता चला था कि विवि ने क्रॉस्ड चेक की जगह अनक्रॉस्ड चेक जारी किए, जिस वजह से आरोपी करीब 1,38,42840 की रकम को बैंक से निकलवाने में कामयाब हो गया है। इसको लेकर विवि की कार्यप्रणाली पहले ही सीबीआई के रडार पर है। ऐसे में विवि की संबंधित शाखा के कर्मचारियों अधिकारियों पर शिकंजा कस सकता है। यह घोटाला वर्ष 2015 से 2018 के बीच हुआ है

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