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सतलुज में बही 81 भैंसें

क्षेत्र के नंगल बांध से सतलुज में अचानक छोड़े पानी के कारण 81 के करीब भैंसें पानी के साथ ही बह गईं। इस हादसे से हीर गुज्जरों के घरों में मातम छाया हैं। इन दुधारू पशुओं के सिर पर ही उनके घर का गुजारा चलता था।

हीर गुज्जर बिरादरी के लोग गांव कलित्तरां में डेढ़ साल से रह रहे हैैं। उन्होंने सतलुज के किनारे ही डेरा डाला है। यहीं वे भैंसों के सिर पर दूध का कारोबार कर अपना पालन-पोषण कर रहे हैं। रविवार सुबह करीब 11 बजे गुज्जरों ने 150 के करीब भैंसे पानी पीने के लिए दरिया के किनारे छोड़ रखी थीं।

अचानक पानी आ जाने से भैंसें तेज बहाव में बह गईं। गुज्जरों ने बीबीएमबी मैनेजमेंट पर कथित आरोप लगाते कहा कि विभाग हमेशा ही ज्यादा पानी छोड़ने से पहले दरिया के साथ लगते गांवों में मुनियादी करवाता है या सरपंचों को सूचित करता है।

इस बार ऐसा कुछ नहीं किया गया। इसके कारण हादसा हुआ। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के सूत्रों के अनुसार नंगल बांध से अचानक अधिक पानी कभी भी नहीं छोड़ा जाता। पानी रूटीन में छोड़ा जाता है। गांव के सरपंच भुपिंदर सिंह लाडी और पूर्व सरपंच गुरनाम सिंह ने कहा कि विभाग की ओर से दरिया में अधिक पानी छोड़े जाने संबंधी कोई सूचना नहीं दी गई है।

 उन्होंने बताया कि माल विभाग के अधिकारियों ने मौका देखा और हीर गुज्जरों के बयान दर्ज किए। उन्होंने मांग की है कि गुज्जरों को मुआवजा दिया जाए। इस संबंध में एसडीएम कन्नु गर्ग ने कहा कि इस संबंधी मुनियादी करवाई गई थी। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों को घटना स्थल का जायजा लेने के लिए भेजा है

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