hp news खतरनाक मौसम के बीच भी कुटिया में भक्ति में लीन रहते हैं कैलाश भारती, भोले के दर्शनों के हठ में बिताए कई वर्ष
कड़कती ठंड के बीच मणिमहेश में स्वामी कैलाश भारती (बर्फानी बाबा) की भगवान शिव के प्रति सच्ची लगन ही उन्हें ऐसे वातावरण में रहने की शक्ति प्रदान करती है। भगवान शिव द्वारा बर्फानी बाबा को स्वप्न में उनकी श्रद्धा के प्रति करवाए गए एहसासों से ही वह वर्ष भर मणिमहेश के खतरनाक मौसम के बीच भी अपनी कुटिया में अपने अराध्य की भक्ति में लीन रहते हैं।hp news
शाही स्नान के बाद वर्ष 2019 की संपन्न हुई मणिमहेश यात्रा के दौरान हजारों शिव भक्त शिव की तपोस्थली में नतमस्तक हुए। इतना ही नहीं, मणिमहेश के कैलाश पर्वत के पास स्थित डल झील के पास कुटिया में भगवान शिव की अराधना करने वाले काशी के स्वामी कैलाश भारती से भी आशीर्वाद प्राप्त किया। बर्फानी बाबा के नाम से जाने जाने वाले स्वामी कैलाश भारती वर्ष भर मणिमहेश में ही रहकर अपने पूज्य शिव की अराधना में लीन रहते हैं।hp news
बर्फानी बाबा ने बताया कि कुछ वर्ष पहले वह अपनी यात्रा के दौरान मणिमहेश में भगवान शिव के दर्शनों के लिए पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने यहीं रुककर भगवान शिव के निवास कैलाश पर्वत के सामने ही कुटिया में भोले के दर्शनों को लेकर तपस्या करना आरंभ कर दिया। बाबा ने बताया कि उन्होंने यहां रह कर काफी तपस्या की,hp news
परंतु भगवान भोलेनाथ ने उन्हें दर्शन नहीं दिए, जिसका उन्हें काफी दुख हुआ। यात्रा खत्म होने के बाद भी वह वहीं कुटिया में रुके रहे तथा अपनी तपस्या जारी रखी। साल भर की कड़ी तपस्या के बावजूद भोले ने जब उन्हें दर्शन नहीं दिए, तो उनका भोले बाबा से विश्वास उठने लग पड़ा था। इसके बाद उन्होंने एक और साल वहां रहने की ठानी और भोले से कहा कि अगर इस वर्ष उन्होंने दर्शन नहीं दिए, तो वह आपको नहीं मानेगा। ऐसा कहकर वह अगले साल भी उसी कुटिया में रहने लग पड़े।hp news
बाबा ने बताया कि पांच-छह माह बीत जाने के बाद उन्हें स्वप्न में भोले ने कैलाश पर्वत पर बुलाया, वह अपने हाथों के दर्शन दिए। स्वामी ने बताया कि सुबह जब उनकी आंख खुली, तो उन्हें ऐसा एहसास हुआ कि भगवान शिव ने उन्हें अपने हाथों से दुलारा हो। अब कई बार साल साल भर भोले के पर्वत के निवास स्थान के सामने कुटिया में रहते हैं और वहां तपस्या करते हैं। मणिमहेश में दर्शनों के लिए जाने वाले श्रद्धालु भगवान शिव के निवास कैलाश पर्वत के साथ-साथ बर्फानी बाबा से आशीर्वाद लेना भी नहीं भूलते।hp news
यात्रा के समापन के बाद भी वहीं ठहरे रहे, तो भरमौर और हड़सर के कुछ ग्रामीणों ने उन्हें वहां न रहने की सलाह दी और कहा कि उनसे पहले भी कई बाबा यहां आए और भोले के दर्शन की हठ की वजह से उनन्हें जान गंवानी पड़ी। ग्रामीणों ने उन्हें वहां न रुकने का आग्रह किया। स्वामी कैलाश भारती ने कहा कि उन्होंने ग्रामीणों से एक ही बात कही कि भोले के दर्शन के लिए उन्हें प्राणों को त्यागना भी पड़ा, तो वह पीछे नहीं हटेंगे, इसमें भी उन्हें सौभाग्य ही प्राप्त होगा, जिसके बाद वह पर्वत के सामने ही रहने लग पड़े।hp news
शाही स्नान के बाद वर्ष 2019 की संपन्न हुई मणिमहेश यात्रा के दौरान हजारों शिव भक्त शिव की तपोस्थली में नतमस्तक हुए। इतना ही नहीं, मणिमहेश के कैलाश पर्वत के पास स्थित डल झील के पास कुटिया में भगवान शिव की अराधना करने वाले काशी के स्वामी कैलाश भारती से भी आशीर्वाद प्राप्त किया। बर्फानी बाबा के नाम से जाने जाने वाले स्वामी कैलाश भारती वर्ष भर मणिमहेश में ही रहकर अपने पूज्य शिव की अराधना में लीन रहते हैं।hp news

बर्फानी बाबा ने बताया कि कुछ वर्ष पहले वह अपनी यात्रा के दौरान मणिमहेश में भगवान शिव के दर्शनों के लिए पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने यहीं रुककर भगवान शिव के निवास कैलाश पर्वत के सामने ही कुटिया में भोले के दर्शनों को लेकर तपस्या करना आरंभ कर दिया। बाबा ने बताया कि उन्होंने यहां रह कर काफी तपस्या की,hp news
परंतु भगवान भोलेनाथ ने उन्हें दर्शन नहीं दिए, जिसका उन्हें काफी दुख हुआ। यात्रा खत्म होने के बाद भी वह वहीं कुटिया में रुके रहे तथा अपनी तपस्या जारी रखी। साल भर की कड़ी तपस्या के बावजूद भोले ने जब उन्हें दर्शन नहीं दिए, तो उनका भोले बाबा से विश्वास उठने लग पड़ा था। इसके बाद उन्होंने एक और साल वहां रहने की ठानी और भोले से कहा कि अगर इस वर्ष उन्होंने दर्शन नहीं दिए, तो वह आपको नहीं मानेगा। ऐसा कहकर वह अगले साल भी उसी कुटिया में रहने लग पड़े।hp news
बाबा ने बताया कि पांच-छह माह बीत जाने के बाद उन्हें स्वप्न में भोले ने कैलाश पर्वत पर बुलाया, वह अपने हाथों के दर्शन दिए। स्वामी ने बताया कि सुबह जब उनकी आंख खुली, तो उन्हें ऐसा एहसास हुआ कि भगवान शिव ने उन्हें अपने हाथों से दुलारा हो। अब कई बार साल साल भर भोले के पर्वत के निवास स्थान के सामने कुटिया में रहते हैं और वहां तपस्या करते हैं। मणिमहेश में दर्शनों के लिए जाने वाले श्रद्धालु भगवान शिव के निवास कैलाश पर्वत के साथ-साथ बर्फानी बाबा से आशीर्वाद लेना भी नहीं भूलते।hp news
प्राण भी देने पड़ें , तो दूंगा
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